प्रौद्योगिकी, नवाचार और भारतीय ज्ञान प्रणाली: समकालीन संदर्भ में प्रासंगिकता और संभावनाएँ

लेखक

  • दलीप सिंह बिष्ट असिस्टेंट प्रोफेसर, राजनीति विज्ञान विभाग, राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय अगस्त्यमुनि, रुद्रप्रयाग (उत्तराखंड) ##default.groups.name.author##

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https://doi.org/10.5281/zenodo.19417399

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प्रौद्योगिकी##common.commaListSeparator## नवाचार##common.commaListSeparator## भारतीय ज्ञान प्रणाली##common.commaListSeparator## सतत विकास##common.commaListSeparator## डिजिटलीकरण।

सार

भारतीय ज्ञान प्रणाली प्राचीन काल से ही विज्ञान, गणित, चिकित्सा, खगोल, पर्यावरण एवं दर्शन जैसे क्षेत्रों में समृद्ध परंपरा की वाहक रही है। वर्तमान वैश्वीकरण एवं डिजिटलीकरण के युग में प्रौद्योगिकी और नवाचार विकास के प्रमुख साधन बन गए हैं। यह शोध-पत्र भारतीय ज्ञान प्रणाली और आधुनिक प्रौद्योगिकी के अंतर्संबंध का अध्ययन करता है तथा यह विश्लेषण करता है कि किस प्रकार पारंपरिक ज्ञान को नवाचार और डिजिटल माध्यमों के साथ एकीकृत कर सतत विकास, शिक्षा सुधार और सामाजिक कल्याण को बढ़ावा दिया जा सकता है। अध्ययन में गुणात्मक शोध विधि का प्रयोग करते हुए ऐतिहासिक, विश्लेषणात्मक एवं तुलनात्मक दृष्टिकोण अपनाया गया है। निष्कर्षतः यह स्पष्ट होता है कि भारतीय ज्ञान प्रणाली आधुनिक तकनीकी नवाचार के लिए एक वैचारिक एवं व्यावहारिक आधार प्रदान कर सकती है।

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प्रकाशित

2026-03-28

अंक

खंड

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